उत्तराखंड में निकाय चुनावों को लेकर अब अंतिम दौर का कार्य चल रहा है. वही शहरी विकास द्वारा नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण को मंजूरी दे दी गई. बता दे शहरी विकास निदेशालय द्वारा जारी किए गए आदेशों में नगर पालिका, नगर पंचायत और नगर निगम के लिए अधिसूचना जारी की गई है. वहीं, निदेशालय ने वार्ड के आरक्षणों की भी समय सारणी जारी कर दि है। दरअसल इस बार आरक्षित सीटों पर बड़ा बदलाव किया गया है. बता दे ऋषिकेश नगर निगम एससी को दी है. वहीं देहरादून नगर निगम की बात की जाए तो वो सामान्य यानी अनारक्षित रखा गया है. इसके अलावा हरिद्वार नगर निगम को ओबीसी महिला को दी गई है. साथ ही नगर निगम रुड़की महिला, नगर निगम कोटद्वार अनारक्षित, नगर निगम श्रीनगर अनारक्षित, नगर निगम रुद्रपुर अनारक्षित, नगर निगम काशीपुर अनारक्षित, नगर निगम हल्द्वानी ओबीसी, नगर निगम पिथौरागढ़ महिला और नगर निगम अल्मोड़ा भी महिला को दी गई। हालाँकि कुमाऊं के सबसे बड़े नगर निगम हल्द्वानी की मेयर की सीट ओबीसी होने के बाद अब वार्डो के आरक्षण की लिस्ट भी जारी कर दी गयी जिससे एक बार फिर राजनीतिक गलियारों मे हलचल बढ़ गयी।
वही बात करे उत्तराखंड के कुल 11 नगर निगम की, तो उनमे एससी को एक सीट दी गई है, साथ ही चार सीटें महिलाओं को दी गई हैं. वहीं, नगर पालिका परिषद में कुल 15 सीटें महिलाओं को दी गई हैं जबकि नगर पंचायतों में 16 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गयी हैं। दरअसल आरक्षण सूची से पहले गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक राजनेता अपने-अपने क्षेत्र में तैयारी में लग गए थे, लेकिन आरक्षण सूची आने के बाद कई जगहों पर नेताओं का समीकरण बिगड़ गया है. वही हरिद्वार नगर निगम की बात की जाए तो बीजेपी और कांग्रेस से तमाम चेहरे लंबे समय से क्षेत्र में तैयारी में लगे हुए थे. साथ ही देहरादून और दिल्ली में बैठे नेता भी लगातार स्थानीय नेताओं को आश्वासन दे रहे थे, लेकिन अचानक से ओबीसी महिला सीट हो जाने के बाद अब नए चेहरे का चुनावी मैदान में उतरना साफ हो गया है।