पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुआ आतंकी हमला आज भी देश के ज़हन में ताज़ा है। इस भयावह घटना में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाते हुए 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। हमले की क्रूरता इस बात से और बढ़ गई थी कि पीड़ितों से उनका धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी गई, जिसने पूरे देश को गहरे सदमे और आक्रोश में डाल दिया।
इस दर्दनाक हमले की पहली बरसी से ठीक पहले भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ अपने कड़े रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया है। सेना के अतिरिक्त महानिदेशक (पब्लिक इन्फॉर्मेशन) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सशक्त संदेश साझा करते हुए लिखा, “जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं, तो जवाब निर्णायक होता है। न्याय हुआ है। भारत एकजुट है।”
इस संदेश के साथ जारी पोस्टर में भी स्पष्ट चेतावनी दी गई— “कुछ सीमाएं कभी पार नहीं की जानी चाहिए। भारत नहीं भूलता।” सेना का यह बयान न केवल आतंकियों को सख्त संदेश देता है, बल्कि यह देश की एकजुटता और आतंकवाद के खिलाफ अडिग संकल्प को भी दर्शाता है।
पहलगाम हमले ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था और साथ ही सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र और मानवता के मूल्यों पर गंभीर बहस को जन्म दिया। इस घटना ने यह भी दिखाया कि आतंकवाद केवल जान-माल का नुकसान नहीं करता, बल्कि समाज के ताने-बाने को भी प्रभावित करता है।
हमले में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवार आज भी उस असहनीय दर्द के साथ जी रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा जख्म है जो समय के साथ भी पूरी तरह नहीं भर पाया है।
बरसी के इस मौके पर देश एक बार फिर उन मासूम लोगों को श्रद्धांजलि दे रहा है और यह संकल्प दोहरा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ऐसी घटनाओं का पूरी तरह अंत नहीं हो जाता।