हाथों में गंगाजल, सिर पर पूजा की थाली, होंठों पर ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष और भगवान शिव के दर्शन की आस। सावन के पहले सोमवार पर हरिद्वार और ऋषिकेश के प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि तड़के तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
भोर होते ही हजारों श्रद्धालु मंदिरों की ओर निकल पड़े। किसी ने गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया तो किसी ने बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
हरिद्वार के कांवड़ मार्ग स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सबसे अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव की ससुराल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष—जो भगवान ब्रह्मा के पुत्र और माता सती के पिता थे—का राज्य इसी स्थान पर था। इसी वजह से इस मंदिर का धार्मिक महत्व बेहद विशेष माना जाता है।
मान्यता यह भी है कि सावन के पूरे महीने भगवान शिव दक्षेश्वर महादेव में विराजमान रहते हैं। इसलिए इस माह यहां विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु इस पावन अवसर पर बाबा के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए, ताकि हर श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के भगवान शिव के दर्शन कर सके।
सावन का पहला सोमवार एक बार फिर यह संदेश दे गया कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही अटूट है।