हरिद्वार की सड़कों पर रविवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब विधायक उमेश शर्मा और भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ता टिहरी कूच के लिए निकले। लेकिन घेराव से पहले ही पुलिस ने उनके काफिले को बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद सड़क पर जमकर नारेबाजी, बहस और धक्का-मुक्की का माहौल बन गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और कुछ देर के लिए पूरे इलाके में तनाव जैसी स्थिति बन गई। मिली जानकारी के मुताबिक, विधायक उमेश शर्मा और भीम आर्मी के कार्यकर्ता टिहरी में हुए हालिया घटनाक्रम के विरोध में घेराव करने जा रहे थे। प्रशासन को पहले से इस प्रदर्शन की सूचना थी, जिसके चलते पुलिस ने हरिद्वार में ही बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इस दौरान विधायक और कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया और सड़क पर बैठकर जोरदार प्रदर्शन किया। वहीं पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना और तनावपूर्ण स्थिति से बचने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने हालात को नियंत्रित किया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है और अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विरोध प्रदर्शन को रोकना कानून-व्यवस्था की मजबूरी थी, या फिर लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश?