देहरादून में बच्चों को बाहरी राज्यों से लाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हिन्दू युवा वाहिनी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि बिहार और पश्चिम बंगाल से करीब 30 बच्चों को अवैध तरीके से लाया गया और उन्हें मदरसों में शिक्षा के नाम पर रखा जा रहा है। संगठन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और बच्चों की पहचान व सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं पुलिस प्रशासन से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की अपील भी की गई है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद शासन भी हरकत में आ गया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में व्यापक सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान बच्चों के स्रोत, अभिभावकों की सहमति और उन्हें लाने वालों की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जाएगी। प्रदेश के सभी मदरसों में सघन निरीक्षण शुरू किया जाएगा, जहां वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। साथ ही वर्ष 2025 के अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड समाप्त कर दिया जाएगा, जिसके बाद सभी मदरसों को नए नियमों के तहत मान्यता लेना अनिवार्य होगा।