उत्तराखंड में मौसम ने इस बार ऐसा करवट लिया है जिसने वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है। आमतौर पर मार्च का महीना सर्दी के खत्म होने और गर्मी की शुरुआत का संकेत देता है, लेकिन इस साल पहाड़ों में फिर से बर्फबारी ने मौसम के पूरे पैटर्न पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 26 वर्षों में यह चौथी बार है जब मार्च में बर्फबारी दर्ज की गई है, जो साफ तौर पर मौसम चक्र में बढ़ती अस्थिरता को दर्शाता है। मौसम विभाग के अनुसार, लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ इसकी बड़ी वजह हैं, जो हिमालयी क्षेत्रों में नमी और ठंडक बनाए रखते हैं। इसी कारण बदरीनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो फीट तक बर्फ जम गई है और कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है। प्रदेश के कई जिलों में मौसम की बेरुखी जारी है, जहां बारिश और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में गरज और चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। वहीं देहरादून, टिहरी और नैनीताल में भी हल्की बारिश और आकाशीय बिजली गिरने के आसार हैं, जबकि अन्य जिलों में मौसम शुष्क रह सकता है। राजधानी देहरादून में आंशिक बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान 24°C और न्यूनतम 12°C के आसपास रहने का अनुमान है। दरअसल इस बदलते मौसम का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, जनजीवन और खेती पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटों में मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से काफी नीचे और पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यंत कम दर्ज किया गया है, हालांकि अगले 2–3 दिनों में तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि बारिश और बर्फबारी के दौरान भूस्खलन और सड़कों के बाधित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी बीच चमोली जिले के बदरीनाथ धाम से एक चिंताजनक वीडियो सामने आया है, जहां भारी बर्फबारी के बाद कंचनगंगा क्षेत्र के पास पहाड़ों से बर्फ खिसकती हुई नजर आई और तेजी से नदी की ओर बहती दिखी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम का यह असामान्य व्यवहार भविष्य में और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, मार्च में हो रही यह बर्फबारी सिर्फ एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न की एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।