उत्तराखंड के Haldwani के Banbhoolpura इलाके में रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है। करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों के पुनर्वास की तैयारी में प्रशासन जुट गया है। यह मामला रेलवे की जमीन पर बसे हजारों परिवारों से जुड़ा है, जहां दशकों से 4 से 5 हजार परिवार रह रहे हैं। Supreme Court of India भी साफ कर चुका है कि यह रेलवे की जमीन है, ऐसे में अब इस लंबे विवाद को खत्म करने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास योजना तैयार कर रही हैं, जिसके तहत पात्र परिवारों को Pradhan Mantri Awas Yojana का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं और लोगों की पहचान व दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए इलाके में कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में सिटी मजिस्ट्रेट A.P. Vajpayee के नेतृत्व में अधिकारियों को फॉर्म वितरण और भरवाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके। प्रशासन के अनुसार अगले तीन दिनों तक घर-घर जाकर पात्र परिवारों को फॉर्म बांटे जाएंगे, जबकि 21 मार्च से चिन्हित छह स्थानों पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे, जहां फॉर्म भरवाने और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके बाद सभी फॉर्म एकत्र कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता भी बनी हुई है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि किसी भी परिवार को बेघर न होना पड़े और सभी को समय पर सुरक्षित पुनर्वास मिल सके, ताकि इस बड़े और संवेदनशील मुद्दे का संतुलित समाधान निकाला जा सके।