समय रैना को मुकेश खन्ना का करारा जवाब: जानिए क्या बोले ‘शक्तिमान’ ?

समय रैना को मुकेश खन्ना का करारा जवाब: जानिए क्या बोले ‘शक्तिमान’
By New31 Uttarakhand

कॉमेडियन समय रैना के हालिया वीडियो ने एक बार फिर उनके पुराने विवादों को सुर्खियों में ला दिया है। इस वीडियो में उन्होंने उस समय को याद किया, जब उनका शो विवादों में घिर गया था और कई सार्वजनिक हस्तियों ने उनके खिलाफ खुलकर विरोध जताया था। समय रैना ने दावा किया कि उस दौरान सिंगर बी प्राक, कॉमेडियन सुनील पाल और अभिनेता मुकेश खन्ना जैसे लोगों ने उनके कंटेंट पर आपत्ति जताई थी।

अब इस वीडियो के सामने आने के बाद मुकेश खन्ना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रोस्टिंग कल्चर और अभद्र भाषा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पहले भी ऐसे कंटेंट के खिलाफ देशभर में विरोध देखने को मिला था। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें खुशी हुई थी कि लोग खुलकर इस तरह के कार्यक्रमों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ हालात फिर से पहले जैसे हो गए। मुकेश खन्ना ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ लोग आलोचना के बावजूद अपनी भाषा और रवैये में बदलाव नहीं लाते। उन्होंने मशहूर कहावत का जिक्र करते हुए कहा, “कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी रहती है,” और इसे एक ऐसी मानसिकता से जोड़ा जो बार-बार गलतियों को दोहराती है।

अभिनेता ने आगे कहा कि कुछ लोग अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होने के बजाय उन पर गर्व महसूस करते हैं और उसी अंदाज में वापस लौट आते हैं। उनके मुताबिक, यह समाज के लिए चिंता का विषय है कि इतने विरोध के बावजूद भी वही भाषा और शैली दोबारा सामने आ रही है।व्यूअरशिप पर सवाल उठाते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि किसी वीडियो के लाखों व्यूज होना उसकी गुणवत्ता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन में “1.5 मिलियन” व्यूज आना जांच का विषय होना चाहिए और दर्शकों को भी यह समझना चाहिए कि वे किस तरह के कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं।रोस्टिंग कल्चर पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि दोस्तों के बीच निजी माहौल में कही गई बातें अलग होती हैं, लेकिन जब वही बातें सार्वजनिक मंच पर कही जाती हैं, तो उनका प्रभाव बदल जाता है।

उनके अनुसार, इस तरह की भाषा न केवल नकारात्मकता फैलाती है, बल्कि परिवार के साथ देखे जाने योग्य मनोरंजन की सीमा भी पार कर जाती है।मुकेश खन्ना ने अंत में कहा कि भारत में विश्वगुरु बनने की क्षमता है, लेकिन यदि समाज गाली-गलौज और अश्लील भाषा को मनोरंजन के रूप में स्वीकार करेगा, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बना रहेगा।

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