उत्तराखंड में निहंगों की गिरफ्तारी के बाद अब हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प के बाद गिरफ्तार किए गए चार निहंगों की रिहाई की मांग को लेकर 150 से अधिक निहंग सिख पांवटा साहिब गुरुद्वारे में डेरा डाले हुए हैं। निहंगों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे यहां से वापस नहीं लौटेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों राज्यों के प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो। दरअसल, 16 जून को उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। देखते ही देखते यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई और कई लोग घायल भी हुए। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए चार निहंगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में निहंग उत्तराखंड पहुंचने लगे। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। कुछ स्थानों पर निहंगों और पुलिस के बीच बहस और तनाव की स्थिति भी देखने को मिली, हालांकि हालात को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।
अब इस पूरे मामले का केंद्र हिमाचल प्रदेश का पांवटा साहिब गुरुद्वारा बन गया है, जहां 150 से ज्यादा निहंग पिछले कई दिनों से रुके हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे निहंगों का कहना है कि उनके चारों साथियों को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है और जब तक उन्हें बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना और विरोध जारी रहेगा। निहंग प्रतिनिधियों के मुताबिक उत्तराखंड प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा है, जिसके चलते फिलहाल प्रस्तावित मार्च को टाल दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच लगातार समन्वय बनाया जा रहा है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का क्या परिणाम निकलता है और यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है।