अंकिता भंडारी की हत्या को काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसे पूरा न्याय कब मिलेगा। दुख की बात यह है कि हर कुछ समय बाद अंकिता का नाम फिर सुर्खियों में आ जाता है, लेकिन चर्चा का केंद्र उसकी हत्या की सच्चाई या न्याय नहीं, बल्कि उससे जुड़े राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बन जाते हैं।हाल के घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर किए गए दावों और नेताओं के नाम लिए जाने को लेकर गिरफ्तारियां हुई हैं।बता दें की भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को डालनवाला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।मामले में सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार के झबरेड़ा, बहादराबाद और नेहरू कॉलोनी व डालनवाला थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो वायरल किए थे, जिनमें भाजपा नेताओं के संबंध में आपत्तिजनक और छवि धूमिल करने वाली सामग्री प्रसारित की गई।शिकायतकर्ताओं का कहना था कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर कई जगह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।लेकिन आम लोगों के मन में एक सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या इन कार्रवाइयों से अंकिता को न्याय मिलेगा? या फिर असली मुद्दा कहीं पीछे छूटता जा रहा है?यदि किसी नेता या व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा है तो कानून अपना काम करेगा। लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि जिस तथाकथित वीआईपी का जिक्र वर्षों से चर्चाओं में होता रहा है, उसकी पहचान और उससे जुड़े सवालों पर क्या प्रगति हुई? क्या जांच एजेंसियां हर पहलू की समान गंभीरता से जांच कर रही हैं? इन सवालों के जवाब आज भी लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाए हैं।
अंकिता भंडारी अब इस दुनिया में नहीं है। उसका परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे में जरूरी यह है कि बहस का केंद्र किसी की राजनीतिक छवि नहीं, बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाना होना चाहिए। जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा जब जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े और हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर सामने आए।आखिरकार, किसी भी मामले में सबसे महत्वपूर्ण न्याय होता है, न कि केवल बयान, आरोप या प्रत्यारोप। अंकिता के परिवार और समाज को आज भी उसी न्याय का इंतजार है।